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नाथूराम गोडसे की अस्थियों को 70 साल बाद भी आज तक नहीं किया गया है विसर्जित,आखिर क्यो!

मित्रों आप लोगों का हमारे Namo fan Club न्यूजज पोर्टल में स्वाजगत है। इस बात से तो आप सभी अवगत ही होगें कि हिन्दु धर्म में अगर किसी का निधन होता है, तो शव को मुखग्नि दी जाती है, और फिर उसकी अस्तियों को गंगा जी में प्रवाहित किया जाता है। ऐसा माना जाता है कि ऐसा करने से मृतक की आत्मा को शांति मिलती है और मोक्ष की प्राप्ति होती है, पर नाथू राम गोडसे निधन को लगभग 70 वर्ष बीत चुके चुके हैं, पर आज तक उनकी अस्थियों को गंगा में विर्सजित नहीं किया गया है। आखिर गोडसे की अस्थियों को क्योंत गंगा में प्रवाहित नही किया गया है?
दरअसल इस बात से तो आप लोग भी अनभिज्ञ नही होगें कि नाथूराम गोडसे ने महात्माह गांधी को तीन गोलिया मार कर हत्याभ की थी, पर क्यास आप लोगों को यह पता है कि आखिर गांधी जी को गोडसे ने गोली क्योंर मारी? तो आपको बता दें कि जब देश को अंग्रेजों से आजादी मिली, उसी के साथ ही भारत और पाकिस्ताोन का विभाजन हुआ जो कि जल्दोबाजी में किया गया, जिसका असर आज भी देखने को मिल रहा है। आपको बता दें कि विभाजन के बाद पाकिस्ता न ने 55 करोड़ रूपये मांगे थे, भारत सरकार ने पहले तो इसे देने से इन्कािर कर दिया था। पर गांधी जी इस अनसन पर बैठ गये जिसकी वजह से भारत को 55 करोड़ रूपये पाकिस्ताेन को देने पड़े, जबकि उस समय पाकिस्ताजन ने सारी हदे पार कर दी थी। आप स्वायं नीचे दिये गये वीडियों में देख सकते है, जिसमें सविस्ताार जानकारी दी गई है।
आपकी जानकारी के लिये बता दें कि गांधी जी के दबाव में भारत सरकार को 55 करोड़ रूपये देने पड़े जिससे हिन्दुि वादियों की तरह गोडसे भी गांधी जी से नाराज थें। जिसके चलते 20 जनवरी 1948 को ही प्रार्थना सभा से करीब 75 फीट दूर एक बम फेंका गया था, पर वह कोशिश नाकाम रही। इस नाकाम कोशिश के बाद नाथूराम ये जिम्माी अपने सर पर लिया, और 30 जनवरी को गोडसे ने इस कार्य को अजाम दे दिया। उसी दिन शाम को 5 बजकर 45 मिनट पर आकाशवाणी ने गांधी के निधन की सूचना देश को दी। वहीं अगर बात की जाये गोडसे की अस्थियों की तो आज भी उनकी अस्थियां पुणे के शिवाजी नगर इलाके में स्थित एक इमारत के कमरे में सुरक्षित रखी हुई हैं।
उस कमरे में उनकी अस्थि कलश के अलावा उनके कुछ कपड़े और हाथ से लिखे नोट्स भी संभालकर रखे गए हैं। अब सोच रहे होगें कि आखिर ऐसा क्योल किया गया है? तो आपको बता दें कि नाथूराम गोडसे ने अपनी अंतिम इच्छा में कहा था कि उनकी अस्थियों को तब तक संभाल कर रखा जाए जब तक सिंधु नदी स्वतंत्र भारत में समाहित न हो जाए और फिर से एक बार अखंड भारत का निर्माण न हो जाए। जब ऐसा हो जाए तभी मेरी अस्थियों को सिंधु नदी में प्रवाहित करा जाए।

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